Wednesday, 14 January 2009
विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह 28 फ़रवरी को
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प्रियंका दुबे को प्रथम पुरस्कार
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Tuesday, 6 January 2009
संयमित जीवन के साथ संयमित लेखन भी जरुरी
कार्यक्रम के पहले दिन तकनीकी सत्र था। जिसमें एमपीसैक्स की ज्वांट डायरेक्टर श्रद्धा बोस, एमपीसैक्स के डॉ. डी एम सक्सेना, बी. एल. शर्मा, विकास पत्रकारिता से जुड़े पत्रकार राकेश दीवान, यूनिसेफ की ऑफिसर इंचार्ज बीना बंदोपाध्याय ने भाग लिया. सभी विद्वानों ने एचआईवी/एड्स के वर्तमान परिदृश्य की चर्चा करते हुए इस कार्यशाला को एचआईवी/एड्स के खिलाफ मील का पत्थर बताया. साथ ही यह भी कहा कि संयमित जीवन के साथ संयमित लेखन भी जरूरी है ताकि उनके अधिकारों का उल्लंघन न होने पाए. इस बीमारी से लड़ने के लिए मीडिया और नागरिकों की साझेदारी को जरुरी बताया। इसके बाद वकील अनुराग श्रीवास्तव ने एचआईवी/एड्स प्रभावितों के अधिकारों से संबंधित विभिन्न धाराओं के बारे में विस्तार से बताया और इससे जुड़े विभिन्न मामलों कि भी चर्चा की। इसी दिन रात में एचआईवी/एड्स प्रभावित पर आधारित एक फ़िल्म माय ब्रदर निखिल का प्रदर्शन किया गया।
दूसरे दिन आईआईएमसी की प्रो. गीता बोम्मजई, हिमांचल विवि के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. टीडीएस आलोक, विकास संवाद के सचिन जैन तथा अलंकार मालवीय ने एचआईवी/एड्स पर अपने वक्तव्य दिए. फ़िर विद्यार्थियों ने एड्स/एड्स प्रभावितों और उनके काउन्सलरों से बात कर विभिन्न कहानियाँ, रेडियो और टेलीविज़न स्क्रिप्ट, डायरी और फीचर लिखे जिस पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी, शरद द्विवेदी, निमिष कुमार, गिरीश उपाध्याय, मधुकर द्विवेदी, गिरीश उपाध्याय, कथाकार सुधीर सुमन के साथ ही यूनिसेफ के कम्युनिकेशन ऑफिसर भाई शेल्ली और एड्स/एड्स प्रभावितों और काउन्सलरों ने अपनी टिप्पणियां दी. यह सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा. चौथे दिन एमपीसैक्स के डॉ. डी. एम. सक्सेना ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब दिया इस दिन आयोजन की अनौपचारिक समाप्ति हुई. कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति विवि परिसर विकास भवन में 6 जनवरी को संपन्न हुई. इस अवसर पर विवि के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्रा, यूनिसेफ के रीजिनल डायरेक्टर हामिद अल बशीर, यूनिसेफ के प्रभाकर सिन्हा और संगीता कृष्णात्रे ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस तरह की कार्यशालाएं आगे भी कराने की बात कही.
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Friday, 19 December 2008
चेन्नई के अविस्मरणीय पल




इस बार आठवां भारतीय विज्ञान संचार सम्मलेन चेन्नई में आयोजित किया गया. इस चार दिवसीय सम्मेलन (10-14 दिसम्बर ) में पत्रकारिता विभाग के अधिकांश छात्रों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए. साथ ही भारत के अलग-अलग जगहों आए लोगों ने भी विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए. चार दिन के इस सम्मेलन में तीन दिन तो लोगों द्वारा पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया गया और एक दिन भ्रमण के लिए था. विभाग को छात्र वर्ग के चार में से तीन पुरस्कार मिले. पुरस्कार रोहिताश्व मिश्रा, प्रियंका दुबे और खुशबू जोशी के नाम रहे. रोहिताश्व के शोध का विषय ''विज्ञान ब्लॉग के प्रति लोगों में जागरूकता और इसके प्रयोगों का अध्ययन'', प्रियंका के शोध का विषय ''इम्पैक्ट ऑफ बिजनेस इन्फोर्मेशन ऑन द साइंटिफिक इकनॉमिक अप्रोच ऑफ़ कॉमन मैन'' तथा खुशबू के शोध का विषय था ''अ कोम्परेटिव अनालिसिस ऑफ़ साइंस चैनल्स''. सम्मलेन के दूसरे दिन की शाम होटल सवेरा में थी. यहाँ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था. यहाँ विभाग के छात्र-छात्रों के साथ अन्य जगहों से आए लोगों ने विभिन्न भाषाओँ में अपनी कविताओं को सुनाया. तीसरे दिन शाम को विद्यार्थियों द्वारा एक नाटक औजार कोई तरकीब कोई का मंचन किया गया. चौथे दिन भ्रमण का आयोजन किया गया था. इसके तहत सभी को इंदिरा गाँधी परमाणु अनुसंधान केन्द्र, कलपक्कम ले जाया गया. यहाँ 500 मेगावाट के निर्माणाधीन पॉवर रिएक्टर के बारें में विस्तार से बताया गया. उसके बाद महाबलीपुरम ले जाया गया. चेन्नई की यात्रा काफी सुखद रही. Posted by पत्रकारिता विभाग at 7:04 pm 1 comments
Tuesday, 2 December 2008
शहीदों के लिए श्रद्धांजलि सभा



भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के परिसर में मुंबई में हुए आतंकवादी घटना में मारे गये पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों ने मोमबत्ती जलाकर और दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना की. साथ ही सभी विद्यार्थियों ने आतंकवाद पर सरकार की ढिलाई की निंदा की. छात्रों के साथ विभिन्न विभागों के शिक्षक भी उपस्थित होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. Posted by पत्रकारिता विभाग at 5:44 pm 5 comments



